बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर के कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में स्काउट गाइड की दो छोटी बच्चियां घंटों खड़ी रहीं। ये बच्चियां कक्षा 9 और 10 में पढ़ती हैं।
सुबह सवा 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक, लगभग सवा दो घंटे तक, ये छात्राएं खड़ी रहीं, जबकि अधिकारी आराम से बैठकर जनसुनवाई करते रहे। किसी अधिकारी ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया।
बच्चियां लगातार बारी-बारी से एक पैर पर शरीर का भार डालती रहीं।
जब कलेक्टर शिवम वर्मा जनसुनवाई में पहुंचे, तो उन्होंने इन बालिकाओं को देखा और उन्हें बैठाने के निर्देश दिए।
हालांकि, कलेक्टर के निर्देश के बाद भी बालिकाएं पीछे जाकर खड़ी हो गईं और उन्हें कुर्सियों पर नहीं बैठाया गया।
गाइड कैप्टन कामाक्षी भट्ट ने बताया कि बच्चों को प्रशिक्षण और ज्ञान के लिए जनसुनवाई में लाया जाता है। उनके अनुसार, ये बच्चे द्वितीय और तृतीय सोपान पास कर चुके हैं और उन्हें लगातार खड़े रहने का प्रशिक्षण प्राप्त है। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में छोटी बच्चियों को जनसुनवाई में नहीं लाया जाएगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि कलेक्टर शिवम वर्मा जनसुनवाई में सभी आवेदकों को बैठाकर उनकी शिकायतें सुनते हैं, इसके बावजूद इन छोटी बालिकाओं को प्रशिक्षण का हवाला देकर घंटों एक ही स्थान पर खड़ा रखा गया।
सिटी बस सेवा बहाल करने की छात्रों की मांग
देवगुराड़िया से कंपेल मार्ग पर सिटी बस सेवा फिर से शुरू करने की मांग को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं जनसुनवाई में पहुंचे।
विद्यार्थियों ने कलेक्टर शिवम वर्मा को एक ज्ञापन सौंपकर बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद से इस मार्ग पर सिटी बस का संचालन बंद है, जिससे उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कंपेल स्थित विद्यालय में आसपास के पांच से छह गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। नियमित सिटी बस सेवा न होने के कारण उन्हें निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है।
छात्रों ने बताया कि निजी बसों का किराया अधिक होने से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। साथ ही, निजी बसों में अत्यधिक भीड़ रहती है, जिससे सुरक्षित और समय पर यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।
उज्जैनी के निवासी दीपक मंडलोई और सावन कुमार ने शिकायत की कि निजी बसें भी सुबह निर्धारित समय से देर से चलती हैं। इस कारण वे विद्यालय समय पर नहीं पहुंच पाते और कई बार उनके एक-दो पीरियड छूट जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग ने 17 वर्ष से नहीं चुकाया किराया
जनसुनवाई में गांधी मजदूर स्मारक निधि ट्रस्ट के मंत्री लक्ष्मीनारायण पाठक भी पहुंचे।
उन्होंने कलेक्टर को अवगत कराया कि शिक्षा विभाग को 1967 में स्कूल संचालन के लिए जमीन किराए पर दी गई थी।
ट्रस्ट के अनुसार, 2010 तक विभाग द्वारा किराया समय पर जमा किया गया, लेकिन उसके बाद से अब तक 17 वर्षों से किराया जमा नहीं किया गया है।
पाठक ने बताया कि इन 17 वर्षों के दौरान शिक्षा विभाग केवल पत्र व्यवहार ही करता आ रहा है, लेकिन किराए का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
वर्तमान में भी शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-32 ट्रस्ट के भवन में संचालित किया जा रहा है।
ट्रस्ट को प्रतिवर्ष नगर निगम का संपत्ति कर अन्य संस्थाओं से उधार लेकर भरना पड़ रहा है।

