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2026-07-29

ईडी ने इंदौर फर्जी बिल घोटाले में 32 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम में दो साल पहले हुए फर्जी बिल घोटाले में कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। ईडी के इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने इस फर्जी बिल घोटाले में कुल 20 हजार पन्नों की चार्जशीट प्रस्तुत की है। कुल 32 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है। घोटाले के मुख्य आरोपित निगम इंजीनियर अभय राठौर के साथ ड्रेनेज व जनकार्य के अन्य कर्मचारी, फर्जी बिल बनाने वाले ठेकेदार फर्मों के संचालक, निगम में बिल-फाइलों का ऑडिट करने वाले स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी व दो सहायक और अन्य निजी व्यक्ति आरोपितों में शामिल हैं। ईडी ने आरोपितों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 में आरोप तय किए हैं। ईडी ने कोर्ट को बताया है कि ये आरोपित अपराध से अर्जित धन को छिपाने, अपने कब्जे में रखने, उसका रोटेशन करने के बाद चैनलाइज कर लाभ लेने व हिस्सा लेने में शामिल हैं।

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घोटाले का खुलासा और एफआईआर

अगस्त 2024 में यह घोटाला उजागर हुआ था कि नगर निगम में असल में सिर्फ फाइलें बनाई गईं और जमीन पर काम किए बिना ही उसके बिल पास कर सरकारी खजाने से पैसा निकाल लिया गया। इस मामले में नगर निगम ने पुलिस थाना एमजी रोड में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों पर जांच के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। एफआईआर इंदौर नगर निगम के कोषागार से फर्जी बिलों, जाली कार्यादेशों (वर्क ऑर्डर), मनगढ़ंत माप पुस्तिकाओं (मेजरमेंट बुक), फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों, हेरफेर किए गए नोटशीटों तथा अन्य जाली दस्तावेजों के माध्यम से सार्वजनिक धन को धोखाधड़ी कर निकालने से संबंधित है।

ईडी की जांच और धन शोधन

ईडी ने इन एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। दस्तावेजी जांच में यह पता चला कि निगम का ठेका लेने वाली फर्मों के कर्ताधर्ताओं ने ऑडिट कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी वर्कऑर्डर फाइलें और जाली बिल तैयार किए। फर्जी बिलों के माध्यम से इंदौर नगर निगम के कोषागार से लगभग 103.42 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि निकालकर उसका गबन किया गया। बाद में इस पैसे को नकद निकाला गया। घोटाले का धन ठेकेदारों, लोकसेवकों तथा घोटाले में शामिल अन्य लोगों ने आपस में बांट लिया। कागजों में फर्जी फर्मों और बैंक खातों से इसे व्यावसायिक लेन-देन का स्वरूप देकर संबंधित एवं संबद्ध संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया। बाद में इस धन का उपयोग चल एवं अचल संपत्तियों के अधिग्रहण एवं व्यक्तिगत खर्चों में किया गया।

संपत्तियों की कुर्की और गिरफ्तारियां

जांच अवधि के दौरान, ईडी ने 5 व 6 अगस्त 2024 को 20 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में आरोपितों की 22.04 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त और फ्रीज की गईं। इनमें नकदी, बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा (एफडी), डीमैट होल्डिंग्स तथा म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ईडी ने कई दस्तावेज एवं डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए। बाद में, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रविधानों के तहत दो अस्थायी कुर्की आदेशों से लगभग 37.14 करोड़ रुपये मूल्य की 52 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया। इन संपत्तियों में मध्य प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश में स्थित व्यावसायिक संपत्तियां, आवासीय मकान, भूखंड तथा कृषि भूमि शामिल हैं। ईडी द्वारा इस मामले में कुल लगभग 59.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क, जब्त अथवा फ्रीज की जा चुकी हैं। ईडी ने जांच के दौरान इस घोटाले के सरगना बताए जा रहे अभय राठौर के साथ ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को अपराध से अर्जित धन के सृजन और उसके शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में केंद्रीय भूमिका के कारण पीएमएलए एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ्तार भी किया। ईडी ने विशेष न्यायालय से पीएमएलए के तहत धन शोधन में प्रयुक्त कुर्क, जब्त एवं फ्रीज की गई संपत्तियों को राजसात करने का अनुरोध भी किया है। विशेष न्यायालय ने आरोपितों को समन जारी कर दिए हैं।