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2026-08-06

प्रदेश के पहले मानसिक स्वास्थ्य उत्कृष्टता केंद्र का निर्माण अटका, 22 करोड़ का प्रोजेक्ट 4 साल में भी अधूरा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मध्य प्रदेश का पहला सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। यह परियोजना इंदौर के बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में 22 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रही है। इस प्रोजेक्ट को 2 साल में पूरा होना था, लेकिन 4 साल का समय बीत जाने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। वर्तमान में, लगभग 2 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट और संशोधित अनुमान (रिवाइज्ड एस्टीमेट) की स्वीकृति तथा फंड की कमी के कारण अंतिम चरण में पहुंचे इसके निर्माण कार्य पर एक बार फिर रोक लग गई है। इससे पूर्व भी भुगतान और फंड की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट तीन बार ठप हो चुका है।

निर्माण कार्य में देरी

इस प्रोजेक्ट के टेंडर पीडब्ल्यूडी की प्लानिंग इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) के माध्यम से जारी किए गए थे, जिसकी कुल लागत 22 करोड़ 23 लाख रुपए तय हुई थी। भोपाल की एक एजेंसी ने 23 प्रतिशत कम दर पर, लगभग 17.5 करोड़ रुपए में, इसका ठेका लिया था। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 24 महीने की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, परंतु फंड जारी होने में लगातार हो रही देरी के कारण 48 महीने बीत जाने पर भी काम पूरा नहीं हो सका है। शुरुआत में, बिजली की एलटी लाइन शिफ्ट करने में हुई देरी के कारण 3-4 महीने तक काम रुका रहा था। इसके उपरांत, भुगतान में देरी के चलते दो बार लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहा, जिसके संबंध में पीआईयू अधिकारियों ने लगातार पत्राचार किया। एजेंसी को बकाया राशि का भुगतान होने के उपरांत कुछ महीने पहले ही कार्य पुनः प्रारंभ हुआ था।

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अतिरिक्त फंड और संशोधित अनुमान का पेच

अतिरिक्त निर्माण और अन्य कारणों से प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 2 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट और संशोधित अनुमान की मंजूरी के लिए पीआईयू द्वारा प्रस्ताव आगे भेजा गया है। इसकी स्वीकृति के इंतजार में पिछले 1 महीने से काम फिर से बंद पड़ा है। इसके अतिरिक्त, एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों का लगभग 1.5 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान भी अभी अटका हुआ है। इस विषय पर पीडब्ल्यूडी (पीआईयू) की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आरती यादव ने बताया कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा।

परियोजना की योजना और प्रगति

अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार, यह योजना 2016 में बनी थी, जिसकी प्रारंभिक स्वीकृति में भी काफी विलंब हुआ था। इस प्रोजेक्ट के तहत 60-60 सीटर क्षमता वाले लड़कियों और लड़कों के हॉस्टल की तीन मंजिला इमारतें तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा, ओपीडी बिल्डिंग भी लगभग बन चुकी है, जबकि वार्ड बिल्डिंग और कैंटीन का सिविल वर्क करीब-करीब पूरा है। वर्तमान में केवल बाहरी व आंतरिक फिनिशिंग, रंगाई-पुताई और परिसर के अंदर एप्रोच रोड का काम शेष है। परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी 60:40 के अनुपात में है, जिसमें राज्य के 40 प्रतिशत हिस्से की राशि जारी होने में देरी हो रही है।

अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया

शासकीय मनोचिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. वीएस पाल के अनुसार, लंबे समय से निर्माण पूरा होने की प्रतीक्षा की जा रही है, परंतु काम अभी तक अधूरा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से निर्माण एजेंसी को लगातार कई पत्र लिखे जा चुके हैं, फिर भी कार्य बंद है। डॉ. पाल ने बताया कि यदि भवन समय पर हैंडओवर हो जाए, तो उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिसके लिए बजट पहले से स्वीकृत है। इसके अलावा, आवश्यक फैकल्टी और स्टाफ पदों की स्वीकृति भी मिल चुकी है।

मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्व

यह परियोजना केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य योजना (एनएमएचपी) के अंतर्गत स्वीकृत की गई थी। इस सेंटर के बनने से नशा मुक्ति केंद्र के साथ-साथ मनोरोगों के उपचार हेतु विभिन्न विशिष्ट केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह संस्थान एक रिसर्च सेंटर के रूप में नए शोधों को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा, जो प्रदेश का अपनी तरह का पहला विशेषज्ञ स्तर का मानसिक स्वास्थ्य केंद्र साबित होगा।