बुलंद सोच, इंदौर।
भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत के प्रतीक इंदौर – फतेहाबाद चंद्रावतीगंज एवं डॉ. अंबेडकर नगर (महू) – इंदौर रेलखंड ने 150 वर्षों से अधिक की गौरवशाली यात्रा पूरी कर ली है। इस रेलखंड पर तीन अगस्त 1876 को पहली बार रेल संचालन प्रारंभ हुआ था, जिसने मालवा क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल इस ऐतिहासिक अवसर पर विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास एवं यात्री सुविधाओं के माध्यम से ऐतिहासिक रेलमार्ग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
अपने समय में महू-इंदौर लगभग 21 किलोमीटर एवं फतेहाबाद चंद्रावतीगंज-इंदौर लगभग 40 किलोमीटर लंबा मीटरगेज रेलखंड मालवा क्षेत्र को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी था।
इस रेलमार्ग ने व्यापार, कृषि, उद्योग एवं जनसंपर्क को नई गति प्रदान की तथा क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समय के साथ भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक रेलखंड का आधुनिकीकरण करते हुए इसे ब्रॉडगेज में परिवर्तित किया। इसे आधुनिक सिग्नलिंग, बेहतर परिचालन व्यवस्था और उन्नत यात्री सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
वर्तमान में यह रेलखंड पश्चिम रेलवे के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और प्रतिदिन हजारों यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं विश्वसनीय रेल सेवा उपलब्ध करा रहा है।
रतलाम मंडल भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीक, सुरक्षित रेल संचालन एवं यात्री-केंद्रित सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध है। मंडल का उद्देश्य अपनी गौरवशाली विरासत को संजोते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वस्तरीय रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इसी संदर्भ में इंदौर-महू के बीच चलने वाली डेमू ट्रेन का ‘स्पेशल’ का दर्जा हटाने की मांग की गई है।

