बुलंद सोच, जबलपुर।
जबलपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत रीमा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गांव में पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न होने के कारण एक पीड़ित परिवार को अपनी 11 वर्षीय मृत बच्ची के शव को ‘हाथ ठेले’ पर रखकर ले जाना पड़ा। जानकारी के अनुसार, ग्राम मोठार निवासी रामस्वरूप मरावी की 11 साल की बेटी माया मरावी का इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज जबलपुर में निधन हो गया था। दुखी परिजन बच्ची के शव को एक निजी वाहन से गांव लेकर आ रहे थे।
वाहन फंसा, हाथ ठेले का सहारा
लेकिन गांव पहुंचने से पहले ही कच्चा रास्ता गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील मिला। वाहन कीचड़ में बुरी तरह फंस गया। काफी मशक्कत के बाद जब गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाई, तो उसे वापस लौटाना पड़ा। इसके बाद बेबस ग्रामीणों ने बरगी नगर से एक हाथ ठेला मंगवाया और मासूम बच्ची के पार्थिव शरीर को ठेले पर रखकर उसी कीचड़ भरे रास्ते से होते हुए गांव तक पहुंचाया।
सड़क का अभाव और ग्रामीणों की समस्या
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव बसने के बाद से लेकर आज तक यहां एक पक्की सड़क तक नहीं बन सकी है। हर बारिश में कच्चा रास्ता दलदल बन जाता है। हालत यह है कि आपातकालीन 108 एम्बुलेंस भी गांव के भीतर आने से बचती है और मरीजों को मुख्य सड़क पर ही उतारकर चली जाती है।
ग्रामीणों का आक्रोश और चेतावनी
इस अमानवीय स्थिति से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल ‘ऑल वेदर’ (सर्व-मौसमी) पक्की सड़क बनाने की मांग की है। मांग करने वालों में शंकर लाल वरकड़े, लेखराम, वृंदावन वरकडे, धुरन सिंह, साजन यादव, पुन्नू लाल, पंजीलाल कुलस्ते, राजू गोंड, नर्मदा प्रसाद, रतीराम, ओम सिंह, प्रकाश मसराम, वीर सिंह परस्ते, ब्रजकिशोर, महेश यादव और रंजीत मरावी शामिल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

