बुलंद सोच, भोपाल।
भोपाल में दो दिन तक चले किसान आंदोलन, धरना और प्रदर्शन को समाप्त करने के पीछे मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ने भले ही मंत्रियों की एक समिति बनाई थी, लेकिन समन्वय की दृष्टि से नीरज मंडलोई को इसमें शामिल किया था। वे मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर वहां उपस्थित थे। मंत्रिमंडलीय समिति और किसान प्रतिनिधियों की बैठक में अपर मुख्य सचिव-कृषि उत्पादन आयुक्त के सी गुप्ता मौजूद नहीं थे। नीरज मंडलोई ने उपस्थित रहकर ऐसा समन्वय किया कि बात बन गई। सरकार द्वारा लिए गए निर्णय से किसान संतुष्ट नजर आए और उन्होंने रात 11:00 बजे अपने आंदोलन को समाप्त कर दिया। इसके बाद सरकार ने राहत की सांस ली।
नए मुख्य सचिव का प्रभाव
अशोक बर्णवाल ने मुख्य सचिव का कार्यभार संभालने के अगले 24 घंटे में जिस प्रकार बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की, उससे पूरे प्रदेश में यह संदेश गया कि वे प्रदेश में कुछ नया करके दिखाएंगे। बर्णवाल के बारे में कहा जाता है कि वे जहां भी रहे, उन्होंने सरकार के लिए बेहतर परिणाम दिए हैं। बताया गया है कि मुख्यमंत्री से उनकी ट्यूनिंग बहुत अच्छी है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि आने वाले समय में प्रदेश में विकास और प्रगति का नया मार्ग प्रशस्त होगा।
संभागीय कमिश्नरों की स्थिति
मध्य प्रदेश में शायद यह पहली बार हो रहा है जब भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक ही बैच के पांच अधिकारी संभागीय कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। ये सभी 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उज्जैन संभाग में आशीष सिंह, इंदौर संभाग में भास्कर लक्षकार, भोपाल संभाग में कर्मवीर शर्मा, रीवा संभाग में शीलेंद्र सिंह और चंबल संभाग में सुरेश कुमार पदस्थ हैं। इनमें आशीष सिंह, भास्कर लक्षकार और कर्मवीर शर्मा सीधी भर्ती के यानी आरआर अधिकारी हैं। प्रदेश के शेष पांच संभागों में संभागीय कमिश्नर का पद सुशोभित करने वाले अधिकारियों में सागर और जबलपुर में 2006 बैच के क्रमशः अनिल सुचारी और धनंजय सिंह, ग्वालियर और शहडोल में 2008 बैच के क्रमशः मनोज खत्री और सुरभि गुप्ता और नर्मदापुरम संभाग में 2009 बैच के श्रीकांत भनोट हैं।

