बुलंद सोच, जबलपुर।
प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार का असर अब बिजली व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां पर्याप्त बारिश न होने से बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बांधों में जलस्तर कम होने के कारण जल विद्युत (हाइडल) उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
वर्तमान स्थिति यह है कि प्रदेश में प्रतिदिन 13 से 14 हजार मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग को पूरा करने में बिजली कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
सामान्य स्थिति की तुलना में बिजली का उत्पादन करीब 2400 से 2500 मेगावाट कम हो गया है। इस कमी की भरपाई के लिए ताप विद्युत संयंत्रों और बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता बढ़ गई है।
पीक आवर्स में बिजली की मांग अधिक होने के कारण वितरण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। इसी के चलते वितरण कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित रूप से बिजली कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में हर दिन रात के समय औसतन एक से दो घंटे बिजली बंद की जा रही है। बिजली उत्पादन में आई कमी का असर सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां कई जिलों में रोजाना दो से तीन घंटे तक अघोषित बिजली कटौती की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, वितरण कंपनियों को मांग और उपलब्धता के संतुलन के लिए अनौपचारिक स्तर पर लोड मैनेजमेंट करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में बिजली बंद होने पर सामान्य रूप से अधिक हंगामा नहीं होता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में आधे घंटे भी बिजली बंद होने पर शिकायतें और हंगामा शुरू हो जाता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में प्रदेश में अच्छी बारिश होती है और प्रमुख बांधों में जलभराव बढ़ता है, तो हाइडल उत्पादन में तेजी आ सकती है। फिलहाल बिजली व्यवस्था काफी हद तक मानसून की सक्रियता पर निर्भर है।
मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी को तत्काल बिजली खरीदने के लिए करीब दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय करनी पड़ रही है। पावर मैनेजमेंट, पीएमसी के राजीव गुप्ता ने बताया कि बारिश न होने की वजह से बिजली की मांग बढ़ी है, वहीं बांधों में पानी कम होने से बिजली का उत्पादन नहीं किया जा रहा है, जिससे कमी (शार्टेज) बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी स्थिति केवल मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों में भी है और बाजार में शार्ट टर्म के लिए बिजली की उपलब्धता भी नहीं है।
एक नजर में स्थिति
प्रदेश में बिजली की मांग: 13,000 से 14,000 मेगावाट
हाइडल परियोजनाओं की क्षमता: करीब 3,200 मेगावाट
वर्तमान हाइडल उत्पादन: लगभग 800 मेगावाट
उत्पादन में कमी: करीब 2,400 से 2,500 मेगावाट
ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती: 2 से 3 घंटे प्रतिदिन

