बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों को दस साल बाद पदोन्नति मिलनी प्रारंभ हो चुकी है। लगभग 60 हजार कर्मचारियों को पदोन्नति प्राप्त हो चुकी है।
एक माह के भीतर 35 से 40 हजार कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश और जारी किए जाएंगे।
ये पदोन्नतियां वर्तमान में सशर्त हैं और न्यायालयों के आदेश के अधीन रखी गई हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये पदोन्नतियां एक जनवरी, 2025 को उपलब्ध पदोन्नति के पदों के विरुद्ध दी गई हैं।
सोमवार को हाई कोर्ट जबलपुर में पदोन्नति नियम 2025 को लेकर सुनवाई प्रस्तावित है। इस सुनवाई में नियम को लेकर निर्णय सुनाया जा सकता है, क्योंकि प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।
सरकार ने अगले साल दी जाने वाली पदोन्नति की तैयारी प्रारंभ कर दी है। इसके तहत सितंबर-अक्टूबर में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें कराने का निर्णय लिया गया है। ये पदोन्नतियां एक जनवरी, 2026 को उपलब्ध पदों के आधार पर की जाएंगी।
पदोन्नति देने के लिए पांच साल की गोपनीय चरित्रावली देखने के साथ-साथ विजिलेंस क्लीयरेंस भी लेना पड़ता है। इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने और पदोन्नति में विलंब से बचने के लिए सितंबर-अक्टूबर में ही प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। विभाग इसके अनुसार अभी से तैयारी में जुटेंगे।
इस विषय के महत्व को देखते हुए अपर सचिव सामान्य प्रशासन अजय कटेसरिया को रतलाम कलेक्टर का पदभार संभालने से रोक दिया गया है। अजय कटेसरिया ही इस पूरे मामले को देख रहे हैं और इसकी बारीकियों से अवगत हैं।

