बुलंद सोच।
श्रावण-भादौ माह में निकाली जाने वाली महाकालेश्वर की सवारियों के क्रम में पहली सवारी 3 अगस्त को निकाली जाएगी। इस वर्ष श्रावण माह में चार और भादौ माह में दो सवारियां रहेंगी। हर सवारी की अलग थीम तय की गई है; पहली सवारी की थीम वैदिक उद्बोधन रहेगी। सवारी जब शिप्रा तट पर पहुंचेगी, तब 1100 वैदिक बटुक मंत्रोच्चार से उद्घोष के रूप में अर्चना करेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सवारी के लिए सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शाम 4 बजे महाकाल मंदिर के सभामंडप में पूजन के बाद, सवारी परंपरागत मार्ग से शिप्रा तट पहुंचेगी और पूजन के बाद महाकाल मंदिर वापस आएगी।
सुरक्षा एवं व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी दी कि श्रावण माह के पहले सोमवार की व्यवस्थाओं के लिए 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

सवारी का मार्ग
सवारी महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से शाम 4 बजे पूजन-अर्चन के बाद निकाली जाएगी। यह सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार होते हुए शिप्रा तट पहुंचेगी, जहां इसका पूजन-अर्चन किया जाएगा। वापसी में सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होती हुई महाकालेश्वर मंदिर आएगी।
राजसी सवारी की विशिष्टताएँ
राजसी (शाही) सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। इसमें, इस मार्ग के अतिरिक्त, टंकी चौराहा से मिर्जा नईमबेग मार्ग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, गुदरी होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा जाएगा। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, सभी सवारियों में जनजातीय नृत्य दलों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। राजसी सवारी में ड्रोन से पुष्प वर्षा की जाएगी।
सवारी में शामिल घटक
सवारी में सबसे पहले मजिस्ट्रेट वाहन, मंदिर का प्रचार वाहन, तोपची, घुड़सवार दल, पुलिस बैंड, स्काउट गाइड, भजन मंडलियां, नृत्य दल और श्री महाकालेश्वर मंदिर बैंड शामिल रहेंगे। महाकाल बैंड के बाद महाकालेश्वर की पालकी आएगी, जिसके पश्चात एम्बुलेंस, बिजली कंपनी का वाहन, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहन सम्मिलित रहेंगे।

