बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मैहर में मां शारदा मंदिर जाने वाली सड़क को आसपास के मकानों और दुकानों से एक-दो फीट ऊंचा बनाए जाने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए जनहित याचिका निरस्त कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि सड़क निर्माण तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और आवश्यक तकनीकी आकलन के आधार पर किया जाता है। कोर्ट ऐसे तकनीकी निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
मैहर निवासी समाजसेवी मनीष पटेल ने याचिका दायर कर मां शारदा देवी रोपवे गेट से घंटाघर मार्ग तक प्रस्तावित सड़क निर्माण को चुनौती दी थी। आरोप था कि पुराने रास्ते का स्तर कम करने के बजाय उसके ऊपर कंक्रीट की नई सड़क बनाई जा रही है, जिससे सड़क आसपास के मकानों-दुकानों से ऊंची हो गई है। याचिका में जल निकासी और फुटपाथ की व्यवस्था की अनदेखी के आरोप भी लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण से पहले वाहनों के आवागमन और अन्य तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जाता है। तकनीकी विषय होने के कारण हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कोर्ट ने जनहित याचिका निरस्त कर दी। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा।
अन्य न्यायिक घटनाक्रम
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 40 बस रूटों की नई परिवहन योजना पर भी सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने योजना के नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

