बुलंद सोच, ग्वालियर।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में अवैध खनन और परिवहन से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई, जिसमें ड्रोन रिकॉर्डिंग की फुटेज न्यायालय में चलाई गई। इस दौरान जिला कलेक्टर रुचिका चौहान और प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकज मिश्रा उपस्थित रहे।
कोर्ट ने कलेक्टर रुचिका चौहान से पूछा कि क्या वे अवैध खनन रोकने में सक्षम हैं। जवाब में कलेक्टर ने बताया कि वे पुलिस प्रशासन की सहायता से लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।
कोर्ट ने कलेक्टर से नए माइनिंग अधिकारी पंकज मिश्रा के खिलाफ दर्ज मामलों और शिकायतों के बारे में जानकारी मांगी, जिस पर कलेक्टर ने अनभिज्ञता व्यक्त की।
तभी परिवादी के वकील ने कोर्ट को बताया कि कुछ माह पूर्व कलेक्टर ने ही माइनिंग अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इस जानकारी के बाद कलेक्टर कोई जवाब नहीं दे सकीं।
कोर्ट ने शासन से सवाल किया कि जिस माइनिंग अधिकारी के खिलाफ इतने मामले और शिकायतें दर्ज हैं, उसे “ईमानदार अफसर” कैसे बताया जा रहा है।
कोर्ट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और लोकायुक्त दोनों को पूर्व और वर्तमान माइनिंग अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में दोषी पाए जाते हैं तो दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कलेक्टर से फुटेज में दिख रहे रास्तों के बारे में भी सवाल-जवाब किए, लेकिन उनका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
कोर्ट ने सभी खदानों का निरीक्षण कर पूरा रिकॉर्ड पेश करने और अवैध परिवहन के रास्तों पर लगाम लगाने सहित संपूर्ण ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक समय पूछा। कलेक्टर ने इसके लिए 30 सितंबर तक का समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर को 30 सितंबर तक पूरी जानकारी न्यायालय के समक्ष पेश करनी होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि माइनिंग अधिकारी की जिम्मेदारी भी कलेक्टर को निभानी पड़ सकती है। सुनवाई के दौरान अशोक यादव की ओर से गिट्टी बेचने की अनुमति मांगी गई, जिस पर कोर्ट ने कलेक्टर को पूरी जांच करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले की सुनवाई बुधवार को भी होगी। कोर्ट ने वर्तमान प्रभारी माइनिंग अधिकारी को बुधवार को यह जानकारी देने को कहा कि अब तक किसे कितनी जगह कितने समय के लिए स्वीकृत हुई है, कितनी खोदाई हो गई है और कितना माल शेष बचा है। साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि यदि कोई व्यक्ति तय समय से पहले या तय सीमा में खुदाई कर लेता है तो शेष समय में वह क्या करता है और उसके लिए क्या नियम हैं।
अवैध खनन और खनिज परिवहन से जुड़े इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और एसपीई लोकायुक्त के महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाया है। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड और शिवपुरी के आरटीओ को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
राज्य की ओर से बताया गया कि घनश्याम यादव के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दो शिकायतें जांच के अधीन हैं, जबकि लोकायुक्त द्वारा दो अन्य शिकायतों की जांच पूरी कर एफआईआर के लिए निष्कर्ष भोपाल भेजा गया है। प्रभारी खनन अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति की शिकायत लंबित होने की जानकारी दी गई।
सुनवाई में खनन क्षेत्रों से खनिज की मात्रा की निगरानी के लिए धर्मकांटे लगाने, उन्हें ई-चालान और ई-खनिज पोर्टल से जोड़ने तथा 360 डिग्री सीसीटीवी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाने जैसे सुझाव दिए गए। कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि फिलहाल किसी भी स्थान पर धर्मकांटा मौजूद नहीं है।
कोर्ट ने डंपरों के नंबर कैबिन और बॉडी पर स्पष्ट रूप से अंकित रखने तथा निर्धारित ईटीपी मार्ग से ही परिवहन सुनिश्चित करने की बात कही।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि “जो व्यक्ति दशकों तक अपने अधिकारों पर सोया रहे, वह राहत का दावा नहीं कर सकता।”

