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मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी कुलपति नियुक्ति: सरकारी प्रोफेसर के 10 वर्ष अनुभव की शर्त हटेगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (एमयू) के कुलपति की नियुक्ति में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य करने वाली शर्त से राज्य सरकार अब पीछे हटेगी।

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस प्रावधान को हटाने के लिए विधानसभा में नया विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद कुलपति की नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था पुनः लागू हो जाएगी।

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हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया तथा विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

इस मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त को निर्धारित की गई है।

दरअसल, जबलपुर के सुखसागर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर पंकज कमल धरडे ने एमपी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2023 को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

इस संशोधन के तहत कुलपति पद के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया था।

याचिका में कहा गया था कि इस शर्त के कारण निजी मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत अनुभवी प्रोफेसरों व शिक्षाविदों के लिए कुलपति पद के अवसर समाप्त हो गए हैं। याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया था।

सरकार के रुख में बदलाव के बाद, हाई कोर्ट ने इस याचिका को संबंधित प्रकरण के साथ टैग कर संयुक्त सुनवाई के निर्देश दिए हैं।