बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 चर्चा के बाद पारित हो गया। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस विधेयक पर चर्चा के दौरान बताया कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 33 हो गई है। इसी प्रकार, एमबीबीएस सीटों की संख्या 760 से बढ़कर 5,550 हो गई है और पीजी सीटें 140 से बढ़कर 2,862 हो गई हैं। सरकार का लक्ष्य भविष्य में एमबीबीएस सीटों को 10 हजार और पीजी सीटों को 5 हजार तक पहुंचाना है। शुक्ल ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों और विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा रहा है। संशोधन के तहत विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के स्थान पर कुलगुरु और प्रति कुलगुरु पदनाम अपनाए जाएंगे। कुलगुरु चयन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जिसके अनुसार अब स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ इस पद के लिए पात्र होंगे।
अन्य पारित विधेयक
मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026 पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई। सरकार ने निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये की एंडोमेंट फंड (एफडी) की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रखा था। कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर चिंता जताई। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने आश्वस्त किया कि संशोधन के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। सदन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक-2026 को भी पारित किया। इस विधेयक में कुछ मामलों में न्यायालय की निगरानी में समझौते सहित अन्य प्रावधान जोड़े गए हैं, जो बीएनएस में शामिल नहीं थे। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026 भी पारित हुआ। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि संशोधन का उद्देश्य पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाना है। सरकार पहले उन गांवों में पंचायत भवन और सामुदायिक भवन बनाएगी, जहां ये सुविधाएं अभी उपलब्ध नहीं हैं। मध्य प्रदेश माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक-2026 भी सदन से पारित हो गया। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी कानून में किए गए बदलावों के अनुरूप राज्य के कानून को अद्यतन करना है। मध्य प्रदेश निरसन विधेयक-2026 के माध्यम से ऐसे पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा, जिनका अब कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं रह गया है।
