बुलंद सोच, नरसिंहपुर।
विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) मनोज कुमार लढ़िया की अदालत ने हत्या और जातिगत अत्याचार के गंभीर मामले में त्वरित न्याय सुनाते हुए एक ही परिवार के पांच आरोपितों को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय ने अभियुक्त कमलेश प्रजापति (28), अन्नीलाल प्रजापति (50), अखिलेश प्रजापति (24), छोटू उर्फ उमेश (22) एवं सविता बाई (47) को दोषी पाया है। ये सभी ग्राम उमरिया, थाना गोटेगांव के निवासी हैं। इन्हें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1)/190 तथा एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया है।
घटनाक्रम का विवरण
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 14 मार्च 2025 की है। गोटेगांव क्षेत्र के ग्राम उमरिया निवासी नीतेश मेहरा को आरोपित कमलेश प्रजापति ने फोन कर गाली-गलौज करते हुए सूचना दी थी कि वे उसके पिता सुखलाल मेहरा के साथ मारपीट कर रहे हैं। नीतेश तुरंत घटनास्थल, जो एक चना का खेत था, पर पहुंचा। वहां उसने देखा कि आरोपित लाठी और लात-घूसों से उसके पिता सुखलाल को बेरहमी से पीट रहे थे। भूसा छोड़ने को लेकर हुए मामूली विवाद और जातिगत विद्वेष के चलते सुखलाल को गंभीर चोटें पहुंचाई गईं। बाद में अस्पताल ले जाते समय सुखलाल को मृत घोषित कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष और सजा का विवरण
अदालत में अभियोजन की ओर से एडीपीओ अमित कुमार राय ने सशक्त साक्ष्य एवं मौखिक तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर न्यायालय ने पांचों दोषियों को हत्या की धारा 103(1) में आजीवन कारावास एवं 2-2 हजार रुपए का अर्थदंड सुनाया। बलवा एवं अन्य धाराओं में कमलेश, अन्नीलाल और अखिलेश को 2-2 वर्ष का सश्रम कारावास व 500-500 रुपए का अर्थदंड एवं छोटू और सविता बाई को 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास व 500-500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

