बुलंद सोच, भोपाल।
पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई निर्णय नहीं आ जाता, तब तक अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति पर तलवार लटकी रहेगी।
इसकी वजह यह है कि हाई कोर्ट पदोन्नति-2025 के नियम पर तब तक अंतिम निर्णय नहीं सुनाएगा। प्रदेश में इसी नियम के आधार पर पदोन्नतियां हो रही हैं।
पदोन्नति नियम-2002 को हाई कोर्ट जबलपुर ने निरस्त किया था। सरकार ने इस निरस्ती को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मई 2016 से पदोन्नतियां बंद हो गईं थीं।
कर्मचारियों में बढ़ती नाराजगी के कारण सरकार ने उच्च पद का प्रभार देकर एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाई थी।
इसी बीच नया पदोन्नति नियम-2025 लागू किया गया। इसे भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन इस पर स्थगन नहीं मिला।
इसके आधार पर इसी वर्ष जून से विभिन्न विभागों में पदोन्नतियां प्रारंभ हुईं। अब तक लगभग 60 हजार पदोन्नतियां हो चुकी हैं।
स्कूल शिक्षा और पुलिस कर्मचारियों की पदोन्नति होते ही यह संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। नए नियम को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है और सभी पक्षों को सुना जा चुका है।
निर्णय आना है लेकिन अब यह तभी आएगा, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का निराकरण हो जाए। इसके लिए हाई कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह जल्द सुनवाई के लिए प्रयास करे।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण के निराकरण के लिए एक बार फिर जल्द सुनवाई का आवेदन दिया जाएगा।
जब तक मामले का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक पदोन्नति पर तलवार लटकी रहेगी। पदोन्नति आदेश में भी स्पष्ट किया गया है कि ये न्यायालय के आदेश के अधीन हैं और जो निर्णय आएगा उसके आधार पर कदम उठाए जाएंगे।

