बुलंद सोच,
मानसून सत्र में पहले दिन से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है। सरकार ने विपक्ष द्वारा गतिरोध पूरी तरह तोड़ने की शर्त पर संसद के दोनों सदनों में इन मुद्दों पर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब देने का प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को भी दोनों सदनों और संसद परिसर में विपक्ष का हंगामा जारी रहा, वहीं परिसर में एनडीए सांसदों ने भी जवाबी प्रदर्शन किया। इसी दौरान सरकार के वार्ताकारों ने विपक्षी दलों से अलग-अलग बात की। इन वार्ताओं के दौरान यह कहा गया कि यदि विपक्ष गतिरोध तोड़ने पर सहमत होता है, तो अंतिम दो बैठकों में दोनों मुद्दों पर सदन में चर्चा होगी और गृह मंत्री जवाब भी देंगे।
विशेष सत्र और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष की आशंका
सरकार के इस प्रस्ताव से विपक्ष असमंजस की स्थिति में है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को यह आशंका है कि दोनों मुद्दों पर चर्चा के बाद सरकार मानसून सत्र का समय बढ़ाकर परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है।
एफसीआरए विधेयक पर सरकार की तैयारी
सरकार परिसीमन विधेयक पर विपक्ष के कुछ दलों, जैसे डीएमके और एनसीपी (एसपी), को साधने के लिए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया जाएगा और फिर इसे जेपीसी को भेजा जाएगा।
एफसीआरए विधेयक: उद्देश्य और प्रावधान
वर्ष 2019 से 2022 के बीच 13,520 गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेश से 55,741 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। सरकार एफसीआरए कानून में बदलाव के माध्यम से ऐसी रकम की निगरानी करना चाहती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा जिस मद में आया है, वहीं खर्च हो। इस विधेयक का उद्देश्य एक ऐसी अथॉरिटी का गठन करना है, जो किसी संगठन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान की प्रक्रिया को संभाल सके।
एफसीआरए विधेयक पर आरोप और सरकार का स्पष्टीकरण
एफसीआरए विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे विपक्षी दलों का आरोप है कि इसके प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं। विपक्ष का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधान ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग पर रोक लगा सकते हैं। सरकार ने धार्मिक भेदभाव के आरोपों पर स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। सरकार के अनुसार, विधेयक का उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी योगदान को विनियमित करना और उससे जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करना है।

