बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर के सिंधिया परिवार की अरबों-खरबों रुपये की विरासत के बंटवारे पर बहुप्रतीक्षित महा-समझौते की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। ग्वालियर जिला न्यायालय में इस मामले पर अंतिम सहमति की उम्मीद थी, लेकिन अब अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
सोमवार को सुनवाई इसलिए पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि बुआओं के दावों से जुड़ा आवश्यक रिकॉर्ड हाई कोर्ट से जिला अदालत तक नहीं पहुंच पाया। इसी कारण न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 27 जुलाई निर्धारित की है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में यह समझौता आवेदन पेश किया गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सिंधिया परिवार के सदस्यों के बीच वर्षों से चल रहे संपत्ति विवाद को आपसी सहमति से खत्म करने पर सहमति बन चुकी है।
इस समझौते में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनकी बुआएं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और उषा राजे राणा समेत परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते का आधार यह है कि परिवार का जो सदस्य वर्तमान में जिस संपत्ति पर काबिज है, वही उस संपत्ति का अंतिम मालिक माना जाएगा।
यदि न्यायालय इस समझौते को मंजूरी देता है, तो ग्वालियर का जयविलास पैलेस, शिवपुरी की संपत्तियां और अन्य कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का स्वामित्व भी इसी सिद्धांत के आधार पर तय होगा।
सिंधिया राजघराने की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं हैं, बल्कि सर जयाजीराव ट्रस्ट, कृष्ण माधव ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के अधीन हैं।
वहीं, दिल्ली की सिंधिया पॉटरीज की जमीन पर बनी कोठियों में परिवार के कई सदस्य वर्तमान में निवास कर रहे हैं।
यदि यह महा-समझौता अदालत से मंजूरी पा जाता है, तो दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो सकता है। ग्वालियर में चल रहे पांच मामले भी वापस लिए जाने की संभावना है।
अब सबकी नजर 27 जुलाई की सुनवाई पर है। अगर उस दिन अदालत इस समझौते पर अपनी मुहर लगा देती है, तो सिंधिया राजघराने का वर्षों पुराना संपत्ति विवाद इतिहास बन जाएगा।
