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2026-08-06

हाई कोर्ट में नई व्यवस्था: वादपत्र, याचिकाएं, शपथ पत्र अब दोनों ओर होंगे प्रिंट

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अब डिजिटल पत्राचार की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत हार्ड कॉपी के माध्यम से पत्राचार की पुरानी प्रथा समाप्त कर दी जाएगी। वकीलों को नोटिस और अन्य सूचनाओं की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस अथवा व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अब याचिकाएं, वादपत्र, शपथ पत्र सहित सभी दस्तावेज दोनों ओर प्रिंट किए जाएंगे। हाई कोर्ट को पेपरलेस बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। जारी परिपत्र में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट दस्तावेजों के प्रारूप और डिजिटल पत्राचार संबंधी नई व्यवस्था लागू कर रहा है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य न्यायालयीन कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना, कागज की खपत को कम करना, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना तथा कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाना है।

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दस्तावेज प्रारूप और पत्राचार संबंधी निर्देश

नई व्यवस्था के अनुसार, हाई कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी वादपत्र, याचिकाएं, शपथपत्र तथा अन्य दस्तावेज अब 75 जीएसएम अथवा उससे अधिक गुणवत्ता वाले ए-4 आकार के कागज पर दोनों तरफ प्रिंट किए जाएंगे। दस्तावेजों के लिए टाइम्स न्यू रोमन फॉन्ट, 14 प्वाइंट फॉन्ट साइज और डेढ़ लाइन स्पेसिंग निर्धारित की गई है, जबकि उद्धरण एवं इंडेंट के लिए 12 प्वाइंट फॉन्ट तथा सिंगल लाइन स्पेसिंग का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, दस्तावेजों में बाएं एवं दाएं 4 सेमी तथा ऊपर एवं नीचे 2 सेमी मार्जिन रखना अनिवार्य होगा। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा अधिवक्ताओं को भेजे जाने वाले सभी आधिकारिक पत्राचार अब केवल उनके पंजीकृत ई-मेल पर भेजे जाएंगे, और सूचना की जानकारी के लिए संबंधित अधिवक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस अथवा व्हाट्सएप अलर्ट भी भेजा जाएगा। इन निर्देशों के लागू होने के बाद हार्ड कॉपी के माध्यम से पत्राचार की प्रथा पूर्णतः समाप्त कर दी जाएगी। रजिस्ट्री के सभी स्तरों पर होने वाले आंतरिक कार्यालयीन पत्राचार में भी ए-4 आकार के कागज का दोनों तरफ उपयोग अनिवार्य किया गया है।

राजस्व अधिकारियों को निर्देश

हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि राजस्व अधिकारी विवादित वसीयत के आधार पर नामांतरण नहीं कर सकते हैं।