बुलंद सोच, जबलपुर।
जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने साइबर ठगी के एक मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की जांच पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति ने कहा कि जहां साइबर अपराधी कुछ ही मिनटों में वारदात को अंजाम दे देते हैं, वहीं जांच एजेंसियां कछुए की चाल से काम कर रही हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी देरी से ठगी गई रकम की बरामदगी की संभावना लगातार कम होती जाती है। वहीं, असम पुलिस द्वारा महज 11 दिन में मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपने की कार्रवाई की सराहना की गई।
समन्वय की कमी और राष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साइबर अपराधों की जांच में राज्यों, बैंकों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध अब किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, इसलिए इनके लिए तकनीक आधारित, समयबद्ध और समन्वित राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।
डीजीपी की उपस्थिति और अगली सुनवाई
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। हालांकि, उन्हें अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से उपस्थित होने की अनुमति दी गई। असम के डीजीपी को स्वास्थ्य कारणों से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित करते हुए असम, पश्चिम बंगाल व झारखंड के डीजीपी, मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह), भारत सरकार के गृह मंत्रालय व दूरसंचार विभाग के सचिव, एसपी जबलपुर व जांच अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। “Hi” का मैसेज ओपन करते ही खाता खाली होने और ऐप के जाल में फंसकर तीन लोगों के साइबर ठगी का शिकार होने के मामले भी सामने आए हैं।

