बुलंद सोच, इंदौर।

मंगलवार को इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने बायपास पर मौजूद गड्ढों के फोटोग्राफ पेश किए। इन तस्वीरों को देखने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की और कहा कि ये तो जानलेवा हैं। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूछा कि उसने वर्ष 2023 से अब तक क्या किया।
यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने प्रस्तुत की है। मंगलवार को एनएचएआई की ओर से दिल्ली से वकील उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ठेकेदार कंपनी को हटाया जा चुका है, इसलिए याचिका की अब आवश्यकता नहीं रही। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई और सड़क की बदहाली दर्शाने वाले फोटोग्राफ पेश किए। ये फोटोग्राफ 10 जुलाई 2026 को लिए गए थे, जिनमें नायता मुंडला के पास बायपास पर लगभग 18 फीट चौड़ा गड्ढा दिख रहा था, जिसमें घास भी उगने लगी थी।
इन फोटोग्राफ को देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि यह तो खतरनाक स्थिति है। कोर्ट ने एनएचएआई को मौखिक निर्देश दिए कि वह सात दिन के भीतर बायपास की स्थिति में सुधार लाए। एडवोकेट बजाज ने बताया कि पिछली सुनवाई में उन्होंने मांग की थी कि जब तक बायपास की बदहाली दूर नहीं हो जाती, तब तक टोल टैक्स वसूलने पर रोक लगाई जाए। कोर्ट का समय समाप्त होने के कारण इस पर बहस नहीं हो सकी। मामले में अब एक सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले हादसों और मौतों को गंभीरता से लेते हुए उन पर किसी भी प्रकार की अवैध पार्किंग, अवैध ढाबों, व्यावसायिक अतिक्रमण और वाहनों को असुरक्षित तरीके से रोके जाने को तत्काल प्रभाव से नियंत्रित करने का आदेश दिया है।
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राज्य पुलिस, जिला प्रशासन तथा लोक निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से समर्पित निरीक्षण दल, राजमार्ग निगरानी प्रणाली, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग तथा ई-चालान व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
कोर्ट ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां उच्च क्षमता वाली प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण कैमरे, ट्रक विश्राम स्थल एवं मार्ग-सुविधा केंद्र विकसित करने, आपातकालीन एंबुलेंस, रिकवरी क्रेन तैनात करने, जल निकासी व्यवस्था तथा अतिक्रमण हटाने को सुनिश्चित करने और प्रत्येक जिले में जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्य बल गठित करने के लिए भी कहा है।

