बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर जिला कोर्ट ने एक सड़क हादसे में आंख गंवाने वाले व्यक्ति को राहत प्रदान करते हुए 14 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलवाई। कोर्ट ने बीमा कंपनी, वाहन स्वामी और चालक को यह राशि संदीप को देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को दो आंखें दी हैं और दोनों ही जीवन के लिए जरूरी हैं। यह कहकर कि एक आंख अब भी सुरक्षित है, हादसे के लिए जिम्मेदार अपने दायित्व से बच नहीं सकता।
एडवोकेट जगदीश वैष्णव ने बताया कि यह हादसा 20 मई 2023 को हुआ था। 30 वर्षीय संदीप अपनी मोटर साइकिल से जलूद जा रहा था, तभी रास्ते में सामने से आए एक अन्य वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
हादसे में संदीप के सिर और जबड़े में फैक्चर हो गया, साथ ही उसकी बाईं आंख में गंभीर चोट आई और वह फूट गई। अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के बावजूद संदीप की एक आंख की रोशनी चली गई। चिकित्सकों ने उसे शत प्रतिशत स्थाई अक्षमता (दृष्टिबाधित) होना बताया।
पीड़ित ने टक्कर मारने वाले वाहन के चालक, स्वामी और बीमा कंपनी के विरुद्ध एडवोकेट वैष्णव के माध्यम से परिवाद प्रस्तुत किया और क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की गुहार लगाई। संबंधित पक्षों ने क्षतिपूर्ति देने से बचने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वे अपने दायित्वों से बच नहीं सके। एडवोकेट वैष्णव ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत भी प्रस्तुत किए।
अभिभाषकों के लिए नेत्र शिविर
इंदौर जिला कोर्ट में अभिभाषकों के लिए बुधवार 5 अगस्त 2026 को एक नेत्र शिविर आयोजित किया जा रहा है।
एडवोकेट प्रमोद व्यास, कमल गुप्ता, संजय पवार और मुजीब खान ने बताया कि यह शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा। इसमें नेत्र विशेषज्ञों द्वारा अत्याधुनिक मशीनों की मदद से अभिभाषकों की आंखों की नि:शुल्क जांच की जाएगी।
शिविर में उन्हें आंखों की देखभाल के संबंध में परामर्श भी दिया जाएगा। चिह्नित मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन नि:शुल्क किए जाएंगे।
स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट
इंदौर को स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट मिलेगा, जिससे शिक्षा-रोजगार मामलों में जल्द न्याय मिलने का इंतजार खत्म होगा।

