बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर मेट्रो के भूमिगत सफर की सबसे बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। थाईलैंड से आई टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को असेंबल करने का काम लगभग एक महीने में पूरा हो जाएगा। यह मशीन असेंबल होने के बाद एक महीने बाद जमीन से लगभग 20 मीटर नीचे उतरेगी। मशीन का वजन लगभग 1,000 टन है और इसके अधिकांश पुर्जे 11 ट्रॉलों के माध्यम से इंदौर पहुंचे हैं।
टनल बोरिंग मशीन की क्षमता
अत्याधुनिक टीबीएम 24 घंटे लगातार काम करते हुए प्रतिदिन लगभग 20 मीटर तक सुरंग तैयार करेगी। यह मशीन केवल खुदाई ही नहीं करेगी, बल्कि आगे बढ़ते हुए सुरंग की मजबूत कंक्रीट की दीवारें भी बनाती जाएगी। इससे निर्माण कार्य तेजी से पूरा होने के साथ सुरंग को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
टीबीएम की कार्यप्रणाली
टनल बोरिंग मशीन एक चलता-फिरता भूमिगत कारखाना है। इसका सबसे आगे का हिस्सा गोलाकार कटर हेड होता है, जिसका व्यास साढ़े छह मीटर है। इस हिस्से में लगे मजबूत स्टील कटर लगातार घूमते हुए मिट्टी और चट्टानों को काटते हैं। मशीन आगे बढ़ती रहती है और उसके पीछे सुरंग तैयार होती जाती है। खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और पत्थर मशीन के अंदर लगे सिस्टम और कन्वेयर के जरिए पीछे भेजे जाते हैं, जहां से उन्हें बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया सुरंग के भीतर मलबा जमा होने से रोकती है और मशीन को बिना रुके आगे बढ़ने में सहायता करती है।
सुरंग निर्माण प्रक्रिया
टीबीएम की प्रमुख खासियत यह है कि यह सुरंग खोदने के साथ ही उसकी दीवारें भी तैयार कर देती है। मशीन के भीतर लगे हाइड्रोलिक सिस्टम पहले से तैयार कंक्रीट के सेगमेंट (रिंग) को एक-एक कर जोड़ते चलते हैं। ये रिंग आपस में मिलकर सुरंग की मजबूत गोलाकार दीवार बनाती हैं। इस प्रकार, मशीन जितनी आगे बढ़ती है, उतनी ही लंबाई में पक्की कंक्रीट की सुरंग भी तैयार होती जाती है। यह विधि मिट्टी धंसने के खतरे को कम करती है और निर्माण को तेजी से पूरा करने में सहायक होती है। टीबीएम में मैकेनिकल सिस्टम, हाइड्रोलिक सिस्टम, शक्तिशाली मोटर और गियर जैसी कई आधुनिक तकनीकें एक साथ काम करती हैं। यह पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया गया है कि खुदाई, मलबा हटाने और कंक्रीट रिंग लगाने का काम एक साथ चलता रहे।
भूमिगत मेट्रो का स्वरूप
भूमिगत मेट्रो के लिए दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी। एक सुरंग से ट्रेन शहर की ओर जाएगी, जबकि दूसरी से वापस लौटेगी। दोनों सुरंगें टीबीएम मशीनों की मदद से तैयार होंगी। पहली टीबीएम एयरपोर्ट क्षेत्र में लगाई जा रही है, जहां आबादी कम होने के कारण निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। इसी इलाके में भूमिगत मेट्रो स्टेशन का निर्माण भी चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस हिस्से का काम पूरा होने के बाद एयरपोर्ट से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इंदौर मेट्रो का 17.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर लगभग तैयार हो चुका है, और अब पूरा ध्यान भूमिगत सेक्शन पर केंद्रित है। इंदौर में कुल 12 किलोमीटर मेट्रो भूमिगत रहेगी। पूरे भूमिगत हिस्से का काम पूरा होने में लगभग चार से पांच साल का समय लगने का अनुमान है। पहले चरण में एयरपोर्ट से कालानी नगर तक सुरंग तैयार की जाएगी, जिसके बाद अगले चरण का काम शुरू होगा।

