बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर नगर निगम में भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। एक साल बाद इंदौर में फिर नगर निगम के चुनाव होंगे। भाजपा इस चार साल के कार्यकाल को संतोषजनक मान रही है। इन चार वर्षों में निगम परिषद का बड़े प्रोजेक्टों पर जोर रहा। हालांकि, शहर में गंदे पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों की समस्या से शहरवासी परेशान होते रहे।
भागीरथपुरा पेयजल कांड
पिछले साल इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण 35 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना में डेढ़ हजार से अधिक लोग बीमार भी हुए थे। नर्मदा लाइन में गंदा पानी मिलने के कारण क्षेत्र के निवासियों को डायरिया हो गया था।
100 करोड़ रुपये का घोटाला
भाजपा परिषद के कार्यकाल में 100 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ। हालांकि, यह घोटाला पुरानी परिषद के समय से चला आ रहा था। मौके पर काम हुए बिना ही उनकी फाइलें बनकर तैयार हो गईं और बिल भी मंजूर होते रहे। जिन अधिकारियों को कामों का भौतिक सत्यापन करना होता था, वे भी इस घोटाले में शामिल थे। इस घोटाले की जांच अभी भी जारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में आरोपियों की करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं।
शुरू किए गए प्रमुख कार्य
इंदौर में नर्मदा परियोजना के बिजली बिल पर हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसे कम करने के लिए नगर निगम ने महेश्वर के समीप जलूद में 300 करोड़ रुपये की लागत से एक सोलर प्लांट लगाया है। इस प्लांट से हर माह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है। शहर में भविष्य में पानी की चिंता न रहे, इसके लिए नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू किया है। इस पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम 400 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ है। वर्तमान में शहर में 10 से अधिक सड़कों पर बाधक हिस्सों को हटाकर चौड़ीकरण किया जा रहा है। निगम ने हुकमचंद मिल की जमीन का समाधान निकाला और श्रमिकों को उनके हक का पैसा दिलाया। हाउसिंग बोर्ड 40 एकड़ जमीन पर एक प्रोजेक्ट ला रहा है।
अधूरे रहे कार्य और चुनौतियाँ
शहर में 50 साल पुराने नेहरू स्टेडियम के स्थान पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनना था, लेकिन वह प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। नगर निगम की अपनी वेबसाइट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इस कारण लोगों को कई ऑनलाइन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। एमआर-4 सड़क का निर्माण अभी भी अधूरा है। यह सड़क नए बस स्टेशन से नहीं जुड़ पाई है। भाजपा परिषद ने शहर को ट्रैफिक की समस्या से मुक्त करने का दावा किया था। हालांकि, ट्रैफिक की समस्या अब भी बनी हुई है।
भविष्यान्मुखी योजनाएँ
भाजपा परिषद ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं और उन पर काम शुरू किया है। नर्मदा के चौथे चरण के आने से अगले 15 वर्षों तक शहर में पानी की समस्या नहीं रहेगी। इसके अतिरिक्त, सीवरेज और नई पाइपलाइन बिछाने के काम भी तेजी से किए गए हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सड़कों को चौड़ा किया गया है।

