बुलंद सोच, उज्जैन।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सात वर्ष बाद यात्री बसों के किराए में की गई बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर उज्जैन और आसपास के जिलों से रोजाना अप-डाउन करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ेगा।
इंदौर, देवास, नागदा, रतलाम, शाजापुर और धार सहित विभिन्न मार्गों पर नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए नियमित यात्रा करने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों और निजी क्षेत्र में कार्यरत लोगों का मासिक यात्रा बजट अब बढ़ जाएगा।
दूसरी ओर, बस संचालकों का कहना है कि लंबे समय से बढ़ रही संचालन लागत के बीच यह संशोधन आवश्यक था। परिवहन विभाग ने राजपत्र में नई किराया दरें लागू करते हुए सामान्य बसों का अधिकतम प्रभार्य किराया दो रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर तथा न्यूनतम किराया 10 रुपये निर्धारित किया है।
इसके साथ ही 7 अगस्त से प्रस्तावित निजी बस संचालकों की हड़ताल भी टल गई है। उज्जैन आरटीओ से लगभग 800 बसें संचालित होती हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्री सफर करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किराया बढ़ने का असर सबसे अधिक उन लोगों पर होगा, जो प्रतिदिन बसों से आना-जाना करते हैं। दूरी के अनुसार हर यात्री का मासिक खर्च बढ़ेगा। जिन परिवारों में एक से अधिक सदस्य रोजाना बस से यात्रा करते हैं, उनके घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। निजी कंपनियों में कार्यरत कर्मचारी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी और छोटे व्यवसायी सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
सिंहस्थ से पहले बढ़ोतरी महत्वपूर्ण
किराया वृद्धि का असर धार्मिक पर्यटन पर भी दिखाई देगा। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों से पहुंचते हैं। सप्ताहांत, सावन, भादौ और अन्य पर्वों पर यह संख्या और बढ़ जाती है। अब बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना होगा। वर्ष 2028 में सिंहस्थ महापर्व से पहले यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उस दौरान सार्वजनिक परिवहन पर यात्रियों का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा।
यात्रियों की अपेक्षा और आपरेटरों का पक्ष
यात्रियों की अपेक्षा है कि किराया बढ़ने के साथ बसों की गुणवत्ता, समयपालन, साफ-सफाई और यात्री सुविधाओं में भी सुधार दिखाई देना चाहिए, ताकि अतिरिक्त खर्च के बदले बेहतर सेवा मिल सके। इधर, बस आपरेटरों का कहना है कि वर्ष 2017 के बाद डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स, बीमा, टैक्स और रखरखाव खर्च में लगातार वृद्धि हुई, लेकिन किराया नहीं बढ़ा था। वर्ष 2021 से वे किराया संशोधन की मांग कर रहे थे। सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद फिलहाल 7 अगस्त से प्रस्तावित बस हड़ताल टल गई है।

