बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर। महाकाल मंदिर पार्किंग में उपयोग की जा रही शासकीय जमीन की रजिस्ट्री के संबंध में उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने राज्य सरकार से यह पूछा है कि शासकीय जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई। एडवोकेट जयेश गुरनानी ने यह जानकारी दी।
भूमि का इतिहास और रजिस्ट्री विवाद
गुरनानी ने बताया कि उज्जैन महाकाल मंदिर के पास लगभग 40 हजार वर्गफीट जमीन है, जिसे हरि फाटा पार्किंग के नाम से पहचाना जाता है। वर्ष 1950 में यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय कारखाने के नाम से दर्ज थी। बाद में इस पर निजी नाम दर्ज हो गए। तहसीलदार ने वर्ष 2025 में इस जमीन को शासकीय घोषित करने की अनुशंसा करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के पास फाइल भेजी थी। इस अनुशंसा पर कोई निर्णय होता इसके पहले ही इस जमीन की रजिस्ट्री एक कंपनी को कर दी गई। इस मामले में शिकायतें भी हुई थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद याचिकाकर्ता राजेंद्र कुवेल ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की।
न्यायालय में प्रस्तुत तथ्य
मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष जमीन की वर्तमान स्थिति के साथ ही तहसीलदार द्वारा दी गई रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे गए। गुरनानी ने कोर्ट को यह भी बताया कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन है। इस दौरान उज्जैन में करोड़ों लोग आएंगे, जिससे अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह शासकीय जमीन पार्किंग के रूप में उपयोग की जाती है। मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित की गई है।
