बुलंद सोच, उज्जैन।
उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद मास के आरंभ के साथ, 30 जुलाई से सात सितंबर तक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इस अनुमान को देखते हुए, मंदिर की दर्शन व्यवस्था, समय-सारिणी, सुरक्षा, यातायात और प्रवेश व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए हैं। भगवान महाकाल की दिनचर्या सामान्य दिनों की तुलना में पहले शुरू होगी, दर्शन के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग निर्धारित किए गए हैं, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की गई है, और यातायात संचालन भी विशेष योजना के तहत होगा।
मंदिर खुलने का समय और आरती
श्रावण-भाद्रपद मास के दौरान, महाकाल मंदिर के पट प्रत्येक रविवार को रात 2:30 बजे और अन्य दिनों में रात 3:00 बजे खुलेंगे, जबकि सामान्य दिनों में ये सुबह चार बजे खुलते हैं। पट खुलने के बाद अभिषेक, पूजन और विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती होगी। भस्म आरती में अनुमति प्राप्त लगभग 1700 श्रद्धालु नंदी, गणेश और कार्तिकेय मंडपम में बैठकर दर्शन कर सकेंगे, जबकि अन्य श्रद्धालुओं को चलायमान व्यवस्था से दर्शन कराए जाएंगे। दर्शन का क्रम रात 10 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिससे मंदिर प्रतिदिन औसतन 19 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।
दर्शन व्यवस्था और प्रवेश मार्ग
भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए, मंदिर समिति ने प्रवेश व्यवस्था को श्रेणीवार निर्धारित किया है। सामान्य निःशुल्क दर्शनार्थियों को श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से प्रवेश मिलेगा। 250 रुपये के शीघ्र दर्शन के लिए हरसिद्धि चौराहा और अवंतिका द्वार निर्धारित किए गए हैं। प्रोटोकॉल के तहत आने वाले श्रद्धालु नीलकंठ द्वार से प्रवेश करेंगे, और कांवड़ यात्रियों के लिए भी हरसिद्धि चौराहा एवं अवंतिका द्वार से अलग व्यवस्था रहेगी। सशुल्क और सामान्य दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग बनाई जाएगी।
महाकाल की पारंपरिक सवारियां
श्रावण-भाद्रपद के दौरान भगवान महाकाल की छह पारंपरिक सवारियां निकलेंगी, जिनमें से चार श्रावण और दो भाद्रपद मास में होंगी। इस वर्ष प्रत्येक सवारी को अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक थीम पर सजाया जाएगा, और सभी सवारियां शाम चार बजे परंपरागत मार्ग से निकलेंगी। सवारियों की तिथियां और थीम इस प्रकार हैं: 3 अगस्त (वैदिक उद्बोधन), 10 अगस्त (लोक नृत्य), 17 अगस्त (पुलिस, आर्मी एवं होमगार्ड बैंड), 24 अगस्त (पर्यावरण संरक्षण), 31 अगस्त (84 महादेव की झांकी), और 7 सितंबर (शाही सवारी, सिंहस्थ-2028 थीम)।
अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव
प्रत्येक शनिवार को श्री महाकाल महालोक स्थित त्रिवेणी कला संग्रहालय में 21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव के तहत शास्त्रीय संगीत, नृत्य और गायन की प्रस्तुतियां होंगी।
वाहन पार्किंग व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए महाकाल अन्नक्षेत्र पार्किंग, मेघदूत वन पार्किंग, नीलकंठ पार्किंग, चारधाम पार्किंग, कर्कराज पार्किंग और कार्तिक मेला ग्राउंड पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
शैक्षणिक संस्थानों पर प्रभाव
महाकाल की सवारी के चलते हर सोमवार स्कूल बंद रहेंगे, और इन दिनों की भरपाई के लिए अब रविवार को कक्षाएं लगेंगी।
मंदिर की पांच मुख्य आरतियां
मंदिर में भस्म आरती, बालभोग आरती, भोग आरती, संध्या आरती और शयन आरती होती हैं।

