बुलंद सोच, इंदौर।
तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इस बार 2100 किलोमीटर दौड़ते हुए डाक कावड़ इंदौर पहुंचेगी। यह यात्रा 171 घंटों में पूरी होगी। कांवड़िये अहिल्या की नगरी इंदौर में आकर स्कीम नंबर 78 स्थित अरण्यधाम संत आश्रम के राम-रामेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।
पूर्वी क्षेत्र के बावड़ी वाले हनुमान मंदिर (अरण्य धाम संत आश्रम) के संस्थापक महामंडलेश्वर रामजी बाबा ने बताया कि वर्ष 2015 से अनवरत दौड़ते हुए सीताराम डाक कावड़ की शुरुआत की गई थी। इसके माध्यम से श्रद्धालु सावन माह में अलग-अलग पवित्र धामों से जल लाकर महादेव का अभिषेक करते आ रहे हैं।
इस वर्ष तमिलनाडु के रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से 15 अगस्त को सुबह 9:00 बजे विशेष पूजा-अर्चना एवं अभिषेक के बाद लगातार दौड़ने वाली इस डाक कावड़ की शुरुआत होगी। इसके लिए अरण्य धाम संत आश्रम से श्रद्धालुओं का काफिला 10 अगस्त को इंदौर से रामेश्वरम के लिए रवाना होगा।
सीताराम भक्त मंडल के कमलेश्वर सिंह सिसोदिया ने बताया कि लगभग 250 से 300 कार्यकर्ता व श्रद्धालु 10 अगस्त को इंदौर से रामेश्वरम के लिए प्रस्थान करेंगे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के खान-पान की व्यवस्था के लिए 25 सदस्यीय रसोइयों (महाराज) का दल भी पूरे समय साथ रहेगा।
इस यात्रा में प्रत्येक कांवड़िया बारी-बारी से 150 से 200 किलोमीटर दौड़ेगा।
कावड़ परंपरा के प्रकार
अखंड कांवड़ परंपरा में श्रद्धालु जल लेकर दिन-रात पैदल चलते हैं और रास्ते में कहीं विश्राम नहीं करते हैं।
पैदल कांवड़ परंपरा में श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पैदल यात्रा करते हैं और रात्रि में विश्राम करते हैं।
डाक कांवड़ परंपरा में कांवड़िये कांवड़ लेकर दौड़ते हैं। इसमें कांवड़ एक ही होती है, लेकिन कांवड़िये बारी-बारी से बिना रुके दिन-रात दौड़ते हुए गंतव्य तक पहुंचते हैं। यह परंपरा मुख्य रूप से उत्तराखंड और झारखंड क्षेत्र में प्रचलित रही है।
कावड़ यात्रा की दूरी का विस्तार
वर्ष 2015 से 2019 तक, यह कावड़ यात्रा ओंकारेश्वर से उज्जैन तक 150 किलोमीटर की दूरी तय करती थी।
वर्ष 2020 में खेड़ी घाट से 60 किलोमीटर और वर्ष 2021 में ओंकारेश्वर से 90 किलोमीटर की यात्रा की गई।
वर्ष 2022 में अमरकंटक से 900 किलोमीटर और वर्ष 2023 में गंगोत्री धाम से 1500 किलोमीटर की यात्रा हुई।
वर्ष 2024 में द्वारकाधीश गुजरात से 1100 किलोमीटर और वर्ष 2025 में राम जन्मभूमि अयोध्या से भी 1100 किलोमीटर की यात्रा की गई।

