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2026-07-31

स्वर्णरेखा नदी प्रदूषण: MP हाईकोर्ट का कड़ा रुख, निगम और सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्वर्णरेखा नदी के बढ़ते प्रदूषण और उसके पुनर्जीवन से जुड़ी जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर ताजा और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने विश्वजीत रतोनिया द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं।

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नगर निगम से पूछे गए प्रश्न

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम से पूछा है कि नदी में गिर रहे कचरे को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इसे बचाने की भविष्य की क्या योजना है। कोर्ट ने नगर निगम से यह भी जानना चाहा कि स्वर्णरेखा नदी में कचरा, नाले और जहरीला अपशिष्ट डालने वाले मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने नगर निगम से पूछा है कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अब तक धरातल पर क्या कार्रवाई की गई है और प्रदूषण को पूरी तरह रोकने तथा नदी की सफाई के लिए आगे का क्या एक्शन प्लान तैयार किया गया है।

राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने बताया कि स्वर्णरेखा नदी के पुनर्जीवन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) लगभग एक साल पहले तैयार कर भेजी गई थी। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को डीपीआर की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई कागजी कार्रवाई और जमीनी प्रगति का पूरा ब्योरा पेश करने के लिए 14 दिनों की मोहलत दी है। नगर निगम की ओर से भी नई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।