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2026-08-07

उज्जैन के कालभैरव, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनि आश्रम का 453.41 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

उज्जैन में कालभैरव मंदिर आस्था के रौद्र स्वरूप, मंगलनाथ मंदिर पूजा-अनुष्ठान की परंपरा और सांदीपनि आश्रम गुरु-शिष्य संबंध की गौरवशाली कथा के तीन अलग-अलग आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के केंद्र हैं। सिंहस्थ-2028 से पहले इन तीनों केंद्रों को उनकी विशिष्ट पहचान के अनुरूप नया स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। इस विकास का केंद्र केवल मंदिर नहीं, बल्कि मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालु का पूरा अनुभव है, जिससे ये केंद्र केवल दर्शन के पड़ाव नहीं रहेंगे। कालभैरव में आस्था, मंगलनाथ में साधना और सांदीपनि में ज्ञान की अपनी-अपनी कथा को नए परिसर में महसूस करने का अवसर मिलेगा। इन तीनों परियोजनाओं पर कुल 453 करोड़ 41 लाख रुपये खर्च होंगे। योजनाओं में मंदिरों के जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के साथ वेटिंग एरिया, फैसिलिटी सेंटर, पार्किंग, प्रसादी व खान-पान की दुकानें और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सिंहस्थ में उमड़ने वाली भीड़ के बीच दर्शन की राह को अधिक व्यवस्थित और परिसर को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

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कालभैरव मंदिर का विकास

भगवान कालभैरव के मंदिर परिसर के विकास पर 164.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह विकास कार्य 14.55 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा, जिसमें लगभग 8700 वर्गमीटर का मंदिर कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित है। श्रद्धालुओं के लिए 8480 वर्गमीटर का सर्वसुविधायुक्त फैसिलिटी सेंटर और वेटिंग हॉल बनाया जाएगा। परियोजना में भगवान कालभैरव की प्रतिमा के लिए 6810 वर्गमीटर क्षेत्र और फूल-प्रसादी व खान-पान की दुकानों के लिए 6930 वर्गमीटर का प्रावधान है। सिंहस्थ में वाहनों के बड़े दबाव को देखते हुए, यहां 27300 वर्गमीटर की सरफेस पार्किंग और 8670 वर्गमीटर की मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाएगी। एक प्रशासनिक ब्लॉक भी बनाया जाएगा, जिससे मंदिर के आसपास वाहन, श्रद्धालु और दुकानों की आवाजाही को अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थित किया जा सके।

मंगलनाथ मंदिर का विकास

मंगलनाथ मंदिर के विकास पर 123.90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह परियोजना 4.74 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी, जिसमें मंदिर रोड का चौड़ीकरण, मंदिर का जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण शामिल है। मुख्य मंदिर, माता पूजा हॉल और हवन कुंड सहित 5150 वर्गमीटर का मंदिर कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए 2272 वर्गमीटर का सर्वसुविधायुक्त फैसिलिटी सेंटर और वेटिंग हॉल बनाया जाएगा। फूल-प्रसादी व खान-पान की दुकानों के लिए 568 वर्गमीटर जगह रहेगी, और एक प्रशासनिक ब्लॉक व सरफेस पार्किंग भी प्रस्तावित है।

सांदीपनि आश्रम का विकास

महर्षि सांदीपनि आश्रम के विकास पर 165.01 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 6.58 हेक्टेयर क्षेत्र में आश्रम का जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिसमें लगभग 33800 वर्गमीटर में आश्रम एवं मंदिर परिसर का विकास प्रस्तावित है। यहां विकास का केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भारतीय गुरुकुल परंपरा का अनुभव होगा। परियोजना में भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आधुनिक तकनीक, वर्चुअल इंटरैक्शन, इंटरैक्टिव प्रदर्शन और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है। परिसर में प्रवेश गलियारा, प्रवचन स्थल, श्रद्धालु सुविधाएं और भगवान श्रीकृष्ण की 64 कलाओं की जानकारी देने वाला संग्रहालय प्रस्तावित है। आश्रम क्षेत्र, मंदिर परिसर और ज्ञान पथ भी विकसित किए जाएंगे, तथा कुंड के संरक्षण का भी प्रावधान है।

सिंहस्थ के लिए व्यवस्थित आध्यात्मिक यात्रा

तीनों परियोजनाओं को एक साथ देखने पर यह स्पष्ट होता है कि कालभैरव में वाहन और भीड़ प्रबंधन, मंगलनाथ में पूजा-अनुष्ठान के अनुरूप सुविधा और सांदीपनि आश्रम में ज्ञान एवं गुरु परंपरा का अनुभव – तीनों की अपनी अलग भूमिका होगी। सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं के इन स्थलों पर आने पर चुनौती केवल उन्हें मंदिर तक पहुंचाने की नहीं होगी। चुनौती यह होगी कि श्रद्धालु की यात्रा भीड़ से शुरू होकर अव्यवस्था में खत्म न हो, बल्कि दर्शन, सुविधा और आध्यात्मिक अनुभूति के साथ पूरी हो। यही कारण है कि इन योजनाओं में मंदिर के साथ पूरे परिसर को विकसित करने पर जोर दिया गया है।