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2026-07-29

सरकार सोमवार को पेपर लीक-रोधी विधेयक लोकसभा में पेश करेगी; विपक्ष पुलिस बर्बरता, PM-HM से जवाबदेही पर घेरेगा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

संसद के मानसून सत्र का पहला हफ्ता नीट पेपर लीक और युवाओं के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के चलते हंगामे की भेंट चढ़ गया। आज (27 जुलाई) को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही नए सिरे से शुरू होगी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक पर सरकार के आश्वासनों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाला युवाओं का आंदोलन समाप्त हो गया है। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के दोनों सदनों में बहस में भाग लेने की संभावना है, हालांकि कुछ मुद्दों पर विवाद बने रहने की आशंका है।

केंद्र सरकार सोमवार को सबसे पहले लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा विधेयक पेश करेगी। सत्र के दौरान सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, आयकर (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक पारित कराने पर भी जोर देगी।

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नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा सुलझने के बाद विपक्ष अब संसद में मुख्य रूप से नीट प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस बर्बरता और शिक्षा से जुड़े अन्य अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेगा। इंडिया गठबंधन कुछ और मुद्दों को भी उठाने पर जोर देगा।

विपक्ष के मुख्य मुद्दे

विपक्ष 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित अत्यधिक और बर्बर बल प्रयोग के मुद्दे पर संसद में तत्काल चर्चा की मांग उठा सकता है। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस विषय को ‘गंभीर राष्ट्रीय महत्व’ का बताते हुए राज्यसभा में तुरंत चर्चा के लिए दिन भर के कामकाज को निलंबित करने का नोटिस दिया है।

विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों के लिए आगे आकर माफी मांगनी चाहिए।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही मांगी है। विपक्ष जानना चाहता है कि क्या गृह मंत्री ने छात्रों पर पेलेट गन जैसे घातक बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। इस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं, जिनमें एक 19 वर्षीय छात्र की आंख की रोशनी पर भी खतरे की बात सामने आई है।

विपक्ष यह सवाल भी उठाएगा कि छात्रों पर लाठियां बरसाने वाले सादे कपड़ों में मौजूद लोग पुलिसकर्मी थे या वॉलंटियर, और उन्हें तैनात करने का अधिकार किसने दिया था। इसके साथ ही महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की ओर से की गई मारपीट का मुद्दा भी सदन में उठाया जाएगा।

विरोध प्रदर्शनों से इतर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल शिक्षा की तेजी से बढ़ती लागत और शिक्षा क्षेत्र के लिए सरकार की घटती बजटीय प्रतिबद्धता पर भी प्रहार करेंगे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि घरेलू आय की तुलना में शिक्षा का खर्च काफी तेजी से बढ़ा है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न हुआ है।

विपक्ष की आगे की संसदीय रणनीति और नए पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक, 2026 पर उनका आधिकारिक रुख सोमवार सुबह होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया जा सकता है। राहुल गांधी के अनुसार, इस पर कोई भी फैसला आम सहमति के बाद ही लिया जाएगा, जिससे सरकार की इस बिल को आनन-फानन में पारित कराने की कोशिशों पर सदन में गतिरोध पैदा हो सकता है।

पेपर लीक-रोधी विधेयक: मुख्य प्रावधान

पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए सरकार सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन) विधेयक, 2026 ला रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी, और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह इसे सोमवार को लोकसभा में पेश करेंगे। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सरकार इसे एक ही दिन में पेश करने, विचार करने और पारित कराने की योजना बना रही है।

विधेयक में पेपर लीक या अनुचित साधनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए न्यूनतम जेल की सजा को तीन से पांच साल और अधिकतम जेल की सजा को पांच से 10 साल तक बढ़ाने का प्रावधान है। जुर्माने को अधिकतम 10 लाख से 50 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव है। संगठित अपराधों के मामलों में कम से कम सात साल की जेल (जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकेगा) और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

यदि कोई परीक्षा कराने वाली कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे आठ साल तक कोई भी सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। दोषी फर्म के वरिष्ठ प्रबंधन को भी कम से कम पांच से 10 साल तक की जेल और पांच करोड़ रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, धांधली में शामिल दोषी संस्थानों और माफियाओं की संपत्तियों को कुर्क और जब्त भी किया जा सकेगा।

विधेयक सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार देगा, जहां दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई होगी। पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी करना अनिवार्य होगा, और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा किया जाने का नियम भी रखा गया है।

यह संशोधन विधेयक केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी देता है।

इस विधेयक में पढ़ाई करने वाले आम और नियमित छात्रों के हितों की पूरी सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को इन गंभीर आपराधिक और दंडात्मक धाराओं से बाहर रखा गया है, जिससे निष्पक्ष परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर बेवजह कोई कानूनी दबाव नहीं पड़ेगा।